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उत्कृष्ट नैतिक मूल्य – अनुपालन और लाभ
मैंने अपना प्रॉफेश्नल करियर तीन दशक पहले भारतीय रेल से शुरू किया था। शुरू से ही मैंने पाया कि नैतिक मूल्यों के पालन पर बहुत ज़ोर रहा है। जैसे ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, विश्वसनीयता, पारदर्शिता, सरलता, सहनशीलता, विनम्रता इत्यादि।
देश के संविधान के अंतर्गत ये नैतिक मूल्य देश के सर्वोच्च पद, राष्ट्रपति के पद से लेकर सबसे छोटे पद की ज़िम्मेदारी में निहित है। राष्ट्रपति, सांसदों और संवैधानिक पदों पर जो शपथ ली जाती उसमें नैतिकता प्रमुख है। सभी सार्वजनिक और व्यावसायिक कार्यालयों में ये नैतिक मूल्य आचरण नियमों के द्वारा लागू होते हैं। अपने देश में कुछ निजी क्षेत्र के उपक्रम हैं जो उत्कृष्ट नैतिक मूल्यों के लिए जमाने से जाने जाते है। नैतिक मूल्यों के उल्लंघन पर सार्वजनिक और व्यावसायिक कार्यालयों के आचरण नियमों और देश के कानून में दंड का प्रावधान है।
लेकिन नैतिक मूल्यों के पालन पर ज़ोर एक तरफा है। यानि, नैतिक मूल्य का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उल्लंघन की दशा में आपके खिलाफ कार्यवाही हो सकती और परिणामस्वरूप आपका नुकसान हो सकता है। जैसे अगर आप रिश्वतख़ोरी, गलतबयानी, गैर पारदर्शिता, पक्षपात, किसी भी प्रकार का उत्पीड़न या दुर्व्यहवार करतें हैं तो आपके खिलाफ कार्यवाही हो सकती है और आपकी नौकरी तथा तरक्की पर बुरा असर पड़ सकता है। परिणामस्वरूप आपका नाम सामाजिक रूप से भी कलंकित हो सकता है।
इस तरह से सारा फोकस नैतिक मूल्यों के डाउन साइड पर है। पर नैतिक मूल्यों के अप साइड का क्या? इस दिशा में कोई सोच या कोई विचार नज़र नहीं आता है कि अगर कोई व्यक्ति नैतिक मूल्यों के पालन का उत्कृष्ट नमूना प्रस्तुत करता है तो क्या यह व्यवस्था उसे पुरस्कृत करती है।
आज हमारी व्यवस्था इसी तरह से बनी है कि हम केवल नैतिक मूल्यों के उल्लंघन को ही संबोधित करतें हैं। जैसे सतर्कता आयोग, भ्रष्टाचार रोकने के तरीके, जांच व्यवस्था इत्यादि। सभी सार्वजनिक कार्यालयों में सतर्कता विभाग होता है जिसका काम नैतिक मूल्यों के अतिक्रमण पर नज़र रखना और कार्यवाही करना है। सारा साहित्य भी इसी बात पर केन्द्रित है कि कैसे गलत करने वालों को पकड़ा जाए या कैसे गलती न करें।
आपने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी घटनाएँ देखीं होंगी, जब किसी व्यक्ति को रिश्वत लेने के लिए, यौन शोषण के लिए, यात्रा भत्ते में हेरफेर के लिए, या पक्षपात के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना करना पड़ा हो। किसी भी कार्यालय में इस तरह के कई उदाहरण होंगे जो नैतिक मूल्य के उल्लंघन करने वाले के मन में डर पैदा करेंगे। पर क्या हमारी व्यवस्था उत्कृष्ट आचरण को प्रोत्साहित कर रही है। क्या पदासीन अधिकारियों को हम प्रोत्साहित कर रहें हैं कि अगर आप उत्कृष्ट आचरण करेंगे तो आपको नौकरी और तरक्की में फायदा होगा या समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी?
आज का परिप्रेक्ष्य इस प्रकार का है कि सब की सारी कोशिश रहती है कि आचरण नियमों से संबन्धित कोई गलती न करे। अगर गलती हो भी जाए तो कोशिश होती है कि पकड़े न जाएँ। गलती होने के बाद अपने आप को बचाने के लिए हेरफेर करना या झूठ बोलना भी इसी मानसिकता का परिणाम है। शायद इसी कारण हमारे देश में भ्रष्टाचार हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है और नैतिकता के संतोषजनक स्तर तक पहुँचने का हमारा रास्ता अभी लंबा है।
जिस तरह हमारी व्यवस्था नैतिक मूल्यों के उल्लंघन को संबोधित करती है। उसी तरह से क्या हम ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जो नैतिक मूल्यों के उत्कर्ष पालन को भी संबोधित करे? जिस तरह मूल्यों के अतिक्रमण पर दंडित होने का डर होता है वैसे ही मूल्यों के अनुकरणीय पालन करने पर फायदे की भी आशा होनी चाहिए। जब ऐसी व्यवस्था होगी तब लोगों में उत्कर्ष मूल्यों के पालन की चाहना होगी और प्रतिस्पर्धा होगी। और ऐसी व्यवस्था में एक संतुलन भी नज़र आयेगा कि जहां मूल्यों के उल्लंघन पर नुकसान होगा वहीं मूल्यों के पालन पर फायदा होगा।
पर नैतिक मूल्यों के उत्कर्ष पालन को कैसे मापा जाय? जैसे आचरण नियम के अतिक्रमण को पकड़ना आसान होता है, नैतिकता के उत्कर्ष पालन को मापना बहुत मुश्किल है। और इस बात कि क्या निश्चितता है कि कोई व्यक्ति नैतिक मूल्यों के उत्कर्ष पालन और प्रदर्शन के बाद किसी अनियमितता में भाग नहीं लेगा। शायद इसी कारण सभी संगठन इस जोखिम से बचते हुए रुढ़ीवादी रास्ता अपनाते हैं। पर समाज में नैतिक मूल्यों की अवनीति को रोकने के लिए इस सोच में बदलाव की जरूरत है।
मेरा देश के नीति निर्माताओं से आव्हान है कि इस विषय पर विचार किया जाय और ऐसी व्यवस्था बनाने की कार्यवाही की जाय जिसके तहत हमारा देश नैतिक मूल्यों के पालन की उत्कृष्टता की ओर अग्रसर हो। एक कहावत है कि एक हज़ार मील की यात्रा भी एक कदम से शुरू होती है। इसलिए मेरा अनुरोध सभी संस्थाओं और संगठनो से है कि इस दिशा में पहला कदम लें, केवल अपने लिए नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए।